
राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल 96 और डीजल की रेट 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ी है। महज 9 दिनों के भीतर ईंधन कीमतों में तीसरी बार बढ़ोतरी हुई है। नई दरें लागू होने के बाद जयपुर में पेट्रोल की कीमत 108 रुपए 91 पैसे प्रति लीटर से बढ़कर 109 रुपए 87 पैसे हो गई है। डीजल के दाम 94 रुपए 14 पैसे से बढ़कर 95 रुपए 5 पैसे प्रति लीटर पहुंच गए हैं। जयपुर में शनिवार सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर नई रेट लागू कर दी गई। 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। 15 मई को भी करीब 3 रुपए प्रति लीटर कीमत बढ़ी थी।इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।राजस्थान पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमत डिपो के आधार पर निर्धारित की जाती हैं। संबंधित पेट्रोल पंप से डिपो जितनी दूरी पर होता है, उस आधार पर ट्रांसपोर्टेशन का खर्च जोड़कर पेट्रोल की रेट निर्धारित की जाती है। लेकिन यह बदलाव प्रति लीटर महज कुछ पैसों तक ही सीमित होता है। उदाहरण के तौर पर राजधानी जयपुर शहर और बाहरी इलाकों में भी अलग-अलग रेट होगी। क्योंकि दोनों पर पेट्रोल अलग डिपो से पहुंच रहा है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां 'डेली प्राइस रिवीजन' यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं: 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जातीखाड़ी देशों में लगातार बिगड़ते हालात और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर पड़ रहा है। सरकार की ओर से पहले ही लोगों से ईंधन का सीमित उपयोग करने और सार्वजनिक परिवहन को अपनाने की अपील की जा चुकी है। लेकिन हालात सामान्य नहीं होने और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल के चलते अब ईंधन के दाम बढ़ाना मजबूरी बनता जा रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल-सब्जियों, खाद्य सामग्री, निर्माण सामग्री और ऑनलाइन डिलीवरी जैसी सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है। इससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
23 May 2026